अच्छा लगा आपका आना - फुरशत मिले तो जरूर दो चार पंक्तिया पढें....हँसते रहिये, मुश्कुराते रहिये, और जीवन को इसी खूबसूरती से जीते रहिये...आपका....प्रभात

08 August 2009

याद आ जाती हैं, यादें

कितनी खूबसूरत है, ये चांदनी रात,
चारों और बस शान्ति है,
और अपने घर की छत पर खड़ा मैं,
चाँद निहारता हूँ।
हलकी सी ठंडक है,
जो रह-रह कर मुझे कपां देती है,
फिर भी यहाँ होना,
ये सब महसूस करना,
कितना अच्छा लगता है।

बारिस की बूंदों की टिप-टिप,
कानों को कितनी अच्छी लगती है,
हथेलियों को आगे बढाना,
और बूंदों की शीतलता को,
अपने तन-बदन मे महसूस करना,
अच्छा लगता है।

याद जाती हैं, यादें,
भूली-बिसरी,
वो गाँव की मिटटी,
वो गाँव का पानी।
प्रभात सर्द्वाल

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