अच्छा लगा आपका आना - फुरशत मिले तो जरूर दो चार पंक्तिया पढें....हँसते रहिये, मुश्कुराते रहिये, और जीवन को इसी खूबसूरती से जीते रहिये...आपका....प्रभात

21 August 2009

प्रेम की वीणा

प्रेम की वीणा
मन-मन्दिर में
बजने लगी है
जाने क्यूं।

ख्वाब मिलन के
हाँ प्रियतम से
सजने लगे हैं
जाने क्यूं।

योवन की खुशबु, अंग-अंग में
महकने लगी जाने क्यूं।

चटकने लगी, अब कलियाँ भी
बागों मैं, हाय जाने क्यूं।

धड़कने लगा, दिल मेरा अब
आने को है, कोई ज्यूं।

प्रेम की वीणा
मन-मन्दिर मैं
बजने लगी है
जाने क्यूं।

प्रभात सर्द्वाल

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