अच्छा लगा आपका आना - फुरशत मिले तो जरूर दो चार पंक्तिया पढें....हँसते रहिये, मुश्कुराते रहिये, और जीवन को इसी खूबसूरती से जीते रहिये...आपका....प्रभात

28 September 2009

मदिरा का प्याला

जीवन मेरा मदिरा का प्याला
चला हूँ पथ पर में मतवाला
कलियों का घूंगत खोलूँगा
प्रीत की में भाषा बोलूँगा।

न राह रोके मेरी कोई
रंग-बिरंगी तितलियाँ
चंचल-चितवन बिजलियाँ
में देवदास, में मतवाला
जीवन मेरा मदिरा का प्याला।

बैठ के कुछ पल जीवन पथ पर
भूतकाल को घूरता हूँ
वर्तमान मेरा साथी
में फिर आगे चल देता हूँ
में प्रेम सुरा पीने वाला
जीवन मेरा मदिरा का प्याला।
हैं संगी साथी बहुत मेरे
हैं सुभचिन्तक भी बहुत मेरे
फिर भी में परसाई निराला
जीवन मेरा मदिरा का प्याला।

प्रभात सर्द्वाल

1 comment:

Anonymous said...

Wakai bahut khoobsoorat jeewan jeetain hai, Prabhat .
Accha laga padkar
Niranjan